लगा स्वाद खट्टा !!! – Delhi Poetry Slam

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लगा स्वाद खट्टा !!!

By  Abhishek Patel
चलो बहोत कर लिया काम 
करते है अब थोड़ा आराम 
कुदरत ने शुरू किया है ये अभियान 
अपनों के साथ रहना हो गया है आसान 
कौन किसकी मदद करे
सब लोग खुद ही की मरम्मद करे
थोडा ज्यादा हाथ धोये 
थोडा ज्यादा पानी पिये 
ओर थोडी ज्यादा किताबे पढ़े 
शायद पता अब चला है 
की हाथ ना मिलाये 
मिलाना है तो फिरसे 
लोगो से अपना दिल मिलाये 
थोडा वक़्त मिला है 
अपनों का ओर बाकि सबका 
शुक्रियादा करने का मौका मिला है 
हा माना है की इंसान ही है
कुदरत का सबसे बेहतरीन अविष्कार 
उसी आड़ मे करने चले थे
हम कुदरत का ही बहिष्कार !
करके ये इश्तहार 
बता दिया है उसने 
की न कर तू इतना अहंकार 
वरना ऐसे ही हो जायेगा तू गिरफ्तार 
चाहे कितना आगे बढ़ जाये ओर 
प्रौद्योगिकी की करदे मशाले कायम 
पर भूल जाये तू कुदरत का क़र्ज़ 
निकालेगा वो भी तुरुप का पत्ता 
दिखायेगा किसकी है अभी भी सत्ता 
फिर ना कहना की "लगा स्वाद खट्टा !!!"

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