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क्या कसूर है इन मासूमो का

By Srinidhi Srinivasan

आखिर क्या कसूर है इन मासूमो का

क्या यह इन की गलती है,

कि यह गरीबीं में पैदा हुएइनकी किस्मत में बेकारी और बेदर्दी है?‌

इंसान है सब की तरहइनकी भी वही धरती है,

 यह समाज का हिस्सा हैपर उसी समाज से वंचित हैं|

सिर पर ना पक्की छतना खाने को दो वक्त की रोटी‌ है,

शिक्षा का अभाव हैना ‌सपने देखने की आजा़दी है!

झुलसते है वह माता पिताएक एक पाई जुटाने के वास्ते,

मजबूर हैं हालातो के आगेचाह कर भी अपने बच्चों कि‌ जिंदगी नहीं संवार पाते|

फंसे हैं वह ऐसे मायाजाल मेंजिस से निकलना विषम हैं,

सुधार रहे है वो खुद को,‌पर कम पड़ जाता उनका श्रम है, 

इसलिए वह वहीं के वहीं रह जाते हैं,

बेगुनाह है पर फिर भी सज़ा पाते हैं,

जीने के लिए लड़ते हैंइसलिए कचरा बीनते हैभीख मांगते हैं या अपराध करते हैं,

या थक कर खुद ही गुनाह का शिकार बनते हैं|

आखिर क्या कसूर है इन मासूमो का

क्या यह सच में इन की गलती है,

कि इन्हें विरासत में मिली ऐसी जिंदगी है?

 देश विकसित हो रहा हैपर बिछड़ा हुआ अभी भी उसका यह अंग है,

भ्रष्टाचार और लालच की देन हैंकि यह वर्ग जी रहा बेरंग है!

 अभी मानवता बाकी है ज़माने में,

आओ साथ मिलकर पहल करेंलिखते नयें फसाने है!

वह भौतिकता से दूर हैपर प्यार के हकदार हैं ,

हम थोड़ी अच्छाई तो बांट सकते हैंहम शायद इतने तो मददगार है!

जो हमारे लिए बेकार हैउन्हें देकर उनका दिन बना देते हैं,

नीच समझ कर उन्हें भगाते नहीं हैबल्कि जो आराम से हो पाएवह कर लेते हैं,

कुछ नहीं तो कम से कम एक मुस्कान और दो मीठी बातें कर सकते हैं!

दिल को भी सुकून मिलेगाऔर वह मासूम भी कुछ पल की खुशियां मना लेंगे

हमारे देश के ही हैंउनको भी साथ लेकर आगे बढ़ते हैं,‌ 

आओ छोटे कोशिशो के ज़रिएएक नए भारत की नीव रखतें हैं।

क्यूंकि ये उन मासूमो का कसूर नहीं है

ना ही ये उनकी गलती है। 

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This poem won in Instagram Weekly Contest held by @delhipoetryslam on the theme 'Street Kids'

2 comments

  • Beautifully expressed

    Radhika Ranganathan
  • These kids will become the future of India tomorrow. Great initiative and beautifully written

    Harshit

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