हम दोनों का मिलना – Delhi Poetry Slam

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हम दोनों का मिलना

By Tamra Kapila Gautam

मेरा आपसे मिलना क़िस्मत में था,
पर शायद हम दोनों का मिलना आपको मंज़ूर ना था ।
सोचा था इतना प्यार करके आपका प्यार मिल जाएगा,
ज़िंदगी क्या है इसका मतलब समझ में आयेगा /
शायद आप भी मुझसे थोड़ा प्यार कर लोगे,
क्या पता था आप मुझे छोड़ ही दोगे /
आपने कहा कि आप मिलना चाहते हो, पर,
आपके इस पर ने किया पैदा दिल में पेदा एक डर /
आपने कहा आपके पास सिर्फ़ दिन है सात,
फिर कहा थोड़ा मुश्किल है मिलना दिन हो या रात /
इन सात दिनों में से पाँच दिन काम के लिए,
और बाक़ी दो परिवार को दिए /
मुझसे कहा की मिलने का मन तो है
पर कम्भखत दिन ही नहीं बचे है/
आपके ना मिलने के कारण थे,
जो हम सुनते थे पर समझते नहीं थे।
अब यकीन हुआ कि मेरा आपसे मिलना क़िस्मत में था,
पर  हम दोनों का मिलना  आपको कभी मंज़ूर ना था ।


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