Submissions open for Wingword Poetry Prize 2020

Chalo chalte hain

Shally Agrawal

चलो चलते हैं
कहा जाना है,यह सोचना अभी बाकी हैं।
पर इतने सालों की थकान अब मिटानी हैं
कुछ ढूंढुंले दृश्य आ रहे है सामने 
बस उनको देखकर एक तसवीर बनानी हैं।
चलो चलते है।
वह जाएंगे जहाँ में तुम्हारा हाथ छोड़कर घूम सकु
अपनी नन्ही उंगलियों में ओस की बूदों को पकड सकु
कोई रोके तोके न मुझे किसी भी बात पे
जहा कपड़े में अपनी मर्ज़ी के पेहेन सकु
चलो चलते हैं।
सुनो, ट्रैन से जाएंगे थोड़ी दूर तक फिर बादलो में उड़ेंगे।
ताकि में ज़मीन से आसमान तक एक बार में तय कर सकु
चलो चलते हैं
सारी बातें मुलाकातें यही करकर जाएंगे
सोच रही फ़ोन भी यही छोड़ जाएंगे
वह में अपने दिलो की रिंगटोन को सुन सकु
चलो चलते है।
ऐसे जगह ढूंढना जहा पहाड़ भी हो
टेंट लगाकर हम लकड़िया को जलाकर हाथ सेके
और उस गर्माहट में मैं अपनी मुस्कान घोल सकु
चलो चलते हैं
वह जाएंगे जहा ज्यादा लोग न हो
अर किसी को किसी भी प्रकार का रोग न हो
जहा डर से हमलोग अनजान हो
चलो चलते हैं
वहां तुम मुझसे प्यार भरी बातें मत करना
बस चुपचाप उन लंबी सड़को पर चल देना 
घूमना तो बहना हैं ,मुझे खुद से दूर भागना हैं
चलो कुछ पल के लिए के नाती ज़िन्दगी शुरू करते हैं
चलो चलते हैं।
थोड़ी मुश्किल होगी ऐसे जगह ढूंढने में
पर ढूंढेगें न इस छोटी सी ज़िन्दगी
के अरमान को सच करने के लिए
एक बार दायरों के बाहर सोचेंगे  न 
चलो चलते हैं।

1 comment

  • Akash. Yadav

    Akash kumar

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