नए साल का नया प्रण – Delhi Poetry Slam

Extended window till November 15th to submit your poetry ✍️🥇

नए साल का नया प्रण

By Pratiksha Borthakur
नया साल है आया..
चलो..नया प्रण लेते है!!
अपनी और अपनो की आशाओं को..
एक नया मौका देते है।
पिछले क्षणों को,
वापस ला तो नहीं सकते..
तो..क्यों न बुरी यादें भूलाकर
चेहरों की शिकन को,
हसी में बदल डाले!! 
उतार चढ़ाव कहाँ नहीं होते?
है यह संसार का नियम!
रात अंधेरे से भरे होते है,
वही सवेरों की रौशनी भी..
कभी न खोते अपना संयम!!
नए साल का नया प्रण,
कुछ इस तरह लेते है..
अब खटास का अनुभव हो,
तो चटकारे लेकर..
इस स्वाद का आनंद लेते है!!
जिंदगी हैं बहुत छोटी सी राह..
पलक झपकते ही खत्म हो जाती है!!
इसमे सभी तरह के मोड़ आऐँगे..
अब गाडी कैसे चलानी है,
यह तो हम खुद ही तय करेंगे।
पहिए साथ चोड़ेंगे इस सफर में..
रास्ते में भी गड्ढे भरे होंगे..
पर हमें अड़कर दटे रहना है।
चाहे कोई साथ दे न दे..
बस..गाड़ी को रुकने नहीं देना है!!
नया साल है आया..
चलो..नया प्रण लेते है!!
आने वाले हर क्षण को..
विशवास और खुशियों से सजाते है।।

1 comment

  • Love this❤️❤️

    Abismita

Leave a comment

Please note, comments must be approved before they are published