“चल अब देर हो गयी है। – Delhi Poetry Slam

Submit your poems to Wingword Poetry Competition 2026 ✍️🥇

“चल अब देर हो गयी है।

By Aradhana

 

लिखा है मैंने ख़ास आपके लिए
लिखा है बस आपके लिए

ये बचपन ये शौक़ ये आवारपं
कुछ ही पल के है
मुट्ठी में क़ैद करके
मोती की तरह पीरोलिजिये

बड़प्पन कब आके बोले - ‘चल अब बहुत देर हो गयी है।’
बिछड़ जाएगा वो संसार बनाया था जो इटमेनन से

नजाने कब आके बोले ‘चल अब देर हो गयी है।’

वो दोस्त वो राते वो खिलखिलाहट
जो देर समझके बैठे थे
देख तेरा साया अब उनके भीतर खड़ा है
बोल रहा है ‘चल अब देर हो गयी है।’

मैं बैठा हु यहाँ इस सोच में
कहाँ गए वो दिन वो मुस्कराहट
फूलों सी जिस में, मीठी ख़ुशबु थी समायी

वो भी क्या समय था
वो भी क्या दिन थे
था कुछ अलग, कुछ तो ख़ास था,
अब वो दिन मैं कहाँ ढूँढऊ

अब बस आकर यूँ बोल गया
‘चल अब देर हो गयी है।’

वो दूर तेरी मंज़िल है
जिसकी परछाईं तेरे पीछे है खादी

चल अब उसको गले लगा
सीना तान के बोल,
“बता अब भी देर कहा हुई है?”


Leave a comment

Please note, comments must be approved before they are published